महाराणा प्रताप सिंह का जीवन परिचय| 2022-जयंती| Maharana Pratap Life History| 2022-in-hindi|

महाराणा प्रताप सिंह का जीवन परिचय| 2022-जयंती| Maharana Pratap Life History| 2022-in-hindi|

महाराणा प्रताप सिंह का जीवन परिचय| 2022-जयंती| Maharana Pratap Life History| in-hindi-2022

 

त्याग बलिदान निरंतर संघर्ष और स्वतंत्रता के रक्षक के रूप में विश्व में इस महापुरुष का नाम सदैव सुनहरे अक्षरों में लिखा जायगा कि भारत देश का एक ऐसा राजा था जिन्होंने अपने जीवन काल में मुगलों के सामने अपना सर नहीं झुकाया महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप अपने दुश्मनों से विचलित नहीं होते थे Maharana Pratap Life History  

Maharana Pratap Life History अपने देश के दुश्मन मुगलों के आगे उनकी अधीनता स्वीकार नहीं किया मुगलों के बादशाह अकबर ने महाराणा प्रताप जी के पास सन्देश भिजवाया कि आप मेरी अधीनता स्वीकार कर लो और बदले में मुझसे आधा राज्य अथवा हिंदूस्तान ले लो  तब महाराणा प्रताप जी ने ऐसे राज्य को मैं ठोकर मारता हूं जो अपने देश के स्वाभिमान के खिलाफ हो

महाराणा प्रताप सिंह का जीवन परिचय| जयंती-2022|

Maharana Pratap Life History महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान की मेवाड़ रियासत के कुंभलगढ़ में राणा उदय सिंह व रानी जयवंतबाई के घर हुआ था। महाराणा प्रताप 1572 में मेवाड़ के सिंहासन पर विराजमान हुए थे।Maharana Pratap Life History अपने राज्य की बागडोर संभालते ही महाराणा के सामने कई चुनौतियां शुरू हो चुकी थीं। उस दौर में अकबर देश की कई रियासतों पर अपना वर्चस्व बढ़ाने में लगा था। कई रियासतें उसकी अधीनता स्वीकार कर रही थीं। अकबर ने मेवाड़ को भी अपने अधीन करने की बहुत कोशिश की मगर महाराणा प्रताप ने संधि मित्रता जैसे सभी प्रस्ताव व प्रलोभनों को ठुकरा कर मुगल सेना को युद्धभूमि में चुनौती देना ही मुनासिब समझा।

 

महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हल्दीघाटी का युद्ध 1576|

Maharana Pratap Life History इसके परिणामस्वरूप 18 जून 1576 को हल्दीघाटी का युद्ध हुआ। उस युद्ध में महाराणा की सैन्य तादाद मुगल सेना की अपेक्षा कम थी, मगर उनकी सेना के मनोबल व जुझारूपन में कोई कमी नहीं थी। युद्ध में महाराणा प्रताप ने स्वयं अपनी सेना का कुशल नेतृत्व किया था जिसके चलते साहसी राजपूत हजारों की संख्या के मुगल लाव-लश्कर को भयभीत करके मार भगाने में सफल हुए। इस युद्ध के बाद महाराणा ने विशाल मुगल सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध नीति को इजाद किया जिसके लिए उन्होंने महलों व सुख-सुविधाओं का त्याग करके अरावली की पर्वल श्रृखंलाओं को अपना आशियाना बनाया।

 

महाराणा प्रताप को लोहार जाति का भी सहयोग मिला

 हल्दीघाटी के युद्ध में |

उस समय राजस्थान की गाडि़या लोहार समुदाय के हजारों लोगों ने भी अपना घरबार त्याग कर महाराणा की सेना में शामिल होकर जंगलों में तलवार भाले तीर आदि हथियारों का निर्माण करके देशभक्ति की अनूठी मिसाल कायम की थी।

 

महाराणा प्रताप को अनेकों दुखों का सामना करना पड़ा यहां तक कि  भूखा भी रहना पड़|

Maharana Pratap Life History मेवाड़ की सारी सेना छिन्न भिन्न हो चुकी थी धन संपत्ति कुछ भी नहीं बचा था सेना को संगठित करने हेतु तथा मुगल सैनिकों से अपने को बचाने के लिए वह राजपुरूष परिवार सहित जंगल में भटक रहा था पूरे परिवार ने कई दिनों से कुछ नहीं खाया था उनके पास थोड़ा आटा था, उनकी पत्नी ने रोटियाँ बनाई सभी लोग खाने की तैयारी कर रहे थे तभी एक जंगली बिलाव रोटियाँ उठा ले गया, भूख से बच्चों की हालत बहुत गंभीर हो रही थी

 

ऐसी दशा देखकर पत्नी ने पून घास की रोटियाँ बनाई जिन्हें खाकर पूरे परिवार ने अपनी भूख शांत की

महाराणा प्रताप ने मुगलों से कड़ा संघर्ष किया युद्ध में|

Maharana Pratap Life History महाराणा प्रताप का सशस्त्र संघर्ष सत्ता प्रप्ति या किसी जाति विशेष के लिए नहीं था बल्कि मुगलों के अत्याचार से समाज के सभी वर्गों धर्म संप्रदाय, मानवता तथा संपूर्ण भारत के स्वाभिमान के लिए उन्होंने सशस्त्र क्रांति व बलिदान की राह चुनी थी।Maharana Pratap Life History  मुगलों ने महाराणा प्रताप को हिरासत में लेने के लिए कई वर्षों तक पूरी ताकत झोंक दी मगर नाकाम रहे। प्रतिशोध से भरी राजपूतों की सेना ने 1582 में दिवेर के युद्ध में मुगल सेना पर जोरदार हमला बोलकर दुश्मन को करारी शिकस्त दी। इस युद्ध में मुगल सेनापति सुल्तान खां को महाराणा के पुत्र अमरसिंह राणा ने तथा अकबर के क्रूर सिपहसालार बहलोल खान को महाराणा प्रताप ने अपनी तलवारों के वार से जहन्नुम का रास्ता दिखा दिया था।

 

नतीजतन खौफजदा हुई मुगल सेना को राजपूतों के समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा। उस दिवेर के युद्ध से जुड़ी कई कहावतें आज भी राजस्थान की लोक संस्कृति में मशहूर हैं। कठोर निर्णय के लिए अडिग महाराणा प्रताप ने मुगल सेना के खिलाफ जो दृढ़ संकल्प व प्रतिज्ञा ली थी वो वीरता इच्छाशक्ति देश व दुनिया की कई सेनाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी थी। भारत के राजपूत राजा महाराणा प्रताप की युद्धनीति व जीवनी से प्राप्त हुई। महाराणा प्रताप के उच्चकोटि के सैन्य नेतृत्व व अदम्य साहस से भरे इतिहास से अंग्रेज भी प्रभावित हुए थे। भारतीय सेना में राजपूत रेजिमेंट तथा राजपूताना राइफल राजपूतों के गौरव का प्रतीक हैं।

 

महाराणा प्रताप जी ने क्या प्रण लिया था|

मैं मुगलों की अधीनता कदापि स्वीकार नहीं करूंगा और जब तक चित्तौड़ पर पूनः अधिकार न कर लूंंगा तब तक मैं पत्तलों पर भोजन करूॅंगा और जमीन पर सोऊॅंगा

महाराणा प्रताप जी के प्रतिज्ञा का मेवाड़ की जनता पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा और सारी मेवाड़ की जनता महाराणा प्रताप के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हो गई संकट की इस घड़ी में मेवाड़ की सुरक्षा के लिए महाराणा प्रताप जी के मंत्री भामाशाह ने अपनी सारी  ये महाराणा प्रताप जी के चरणों में रख दिया  महाराणा प्रताप जी ने कहा कि मैं इसे नहीं ले सकता क्योंकि ये गलत है दी हुई वस्तु को वापस नहीं लेना चाहिए

तब भामाशाह ने महाराणा प्रताप जी से कहा कि क्या मैं देश के लिए कुछ नहीं कर सकता ये मेरे लिए धिक्कार का विषय है फिर कुछ सोचकर महाराणा प्रताप जी ने कहा कि ठीक है

 

 महाराणा प्रताप जी अपने मेवाड़ के लिए जिए और मरे|

महाराणा प्रताप जी अपने पुत्र (युवराज) अमर सिंह सुख सुविधा पूणॅ जीवन के विषय में चिन्तित थे इसी बात का महाराणा प्रताप जी को बहुत ही ज्यादा टेनसन था मेरे ना रहने के बाद मेरे मेवाड़ की कौन रक्षा करेगा

महाराणा प्रताप जी अपने युवराज और विश्वास सरदारों को एकत्रित किया और सबसे वचन लिया कि मेरे ना रहने पर आप सभी मेरे मेवाड़ की रक्षा करना जब सब लोगों से आश्वस्त मिल गया तब उन्होंने प्राण त्याग दिया

 

महाराणा प्रताप शौर्य की सराहना|

प्रसिध्द अंग्रेज इतिहासकार कर्नल टाड ने लिखा है कि अरावली की पर्वतमाला में एक सी घाटी नहीं है, जो राणा प्रताप के पुण्य कार्य से पवित्र न हुई हो चाहे वहां उनकी विजय हुई हो या यशस्वी पराजय

महाराणा प्रताप के अंतिम दिन और उनकी मृत्यु किस सन में हुई|

महाराणा प्रताप जी सन् 1572 ई0 से में सिंहासन पर बैठने के समय से लेकर सन् 1597 ई0 में में मृत्युपयॅत राणा जी ने अद्भूत साहस शौर्य तथा बलिदान का परिचय दिया

Maharana Pratap Life History

महाराणा प्रताप के समय मेवाड़ सबसे शक्तिशाली राज्य था|

मेवाड़ उत्तरी भारत के सबसे शक्तिशाली राज्य था

Maharana Pratap Life History

मेवाड़ की प्रभुसत्ता की रक्षा तथा स्वतंत्रता को बनाए रखना राणा प्रताप जी के जीवन का लक्ष्य था

Maharana Pratap Life History

महाराणा प्रताप  जी का नाम सदैव सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा

Youteb

Apr 20, 2022 - Posted by Mukesh Saini - No Comments
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